भारत के राष्ट्रपति का चुनाव
राष्ट्रपति के पद के लिए अर्हताएं
- वह भारत का नागरिक हो |
- वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चूका हो |
- वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है |
- वह संघ सरकार में , राज्य सरकार में , स्थानीय प्राधिकरण में , सार्वजनिक प्राधिकरण में लाभ के पद पर न हो |
* वर्तमान राष्ट्रपति अथवा उप-राष्ट्रपति किसी राज्य का राज्यपाल और संघ अथवा राज्य का मंत्री किसी लाभ के पद पर नहीं माना जाता | इस प्रकार वह राष्ट्रपति पद के लिए अर्हक उम्मीदवार होता हे |
राष्ट्रपति के चुनाव के लिए नामांकन के लिए उम्मीदवार के कम से कम 50 प्रस्तावक होने चाहिए |
प्रत्येक उम्मीदवार भारतीय रिज़र्व बैंक में 15000 रुपये जमानत राशि के रूप में जमा करेगा | यदि उम्मीदवार कुल डाले गए मतों का 1 /6 भाग प्राप्त करने में असमर्थ रहता हे तो यह राशि जब्त हो जाती हे |
राष्ट्रपति का निर्वाचन
राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता प्रत्यक्ष रूप से नहीं करती हे बल्कि एक निर्वाचन मंडल के सदस्यों द्वारा उसका निर्वाचन किया जाता हे |
निर्वाचन मंडल में कौन-कौन शामिल है :
- संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य ,
- राज्य विधानसभाओ के निर्वाचित सदस्य , तथा
- केंद्रशासित प्रदेशों दिल्ली व पुडुचेरी विधानसभाओ के निर्वाचित सदस्य |
- संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य, राज्य विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य, दिल्ली व पुडुचेरी विधानसभा के मनोनीत सदस्य और राज्य विधानपरिषद के सदस्य ( निर्वाचित व मनोनीत ) |
- कोई सभा विघटित हो गई हो तो उसके सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदान नहीं कर सकते |
संविधान में यह प्रावधान हे की राष्ट्रपति के निर्वाचन में विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व समान रूप से हो, साथ ही राज्यों तथा संघ के मध्य भी समानता हो |
अब हम देखते हे की एक विधायक और एक संसद के मतों का मूल्य कैसे निकलते हे
एक विधायक के मत का मूल्य : एक विधायक के मत के मूल्य को निकालने के लिए हम उस राज्य की जनसँख्या जिस राज्य का वह विधायक हे को , उस राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों तथा 1000 के गुणनफल से प्राप्त संख्या द्वारा भाग देने पर प्राप्त होती हे
एक विधायक के मत का मूल्य = राज्य की कुल जनसंख्या
राज्य विधानसभा के कुल निर्वाचित सदस्य * 1000
एक सांसद के मत का मूल्य : एक संसद के मत का मूल्य सभी राज्यों के विधायकों के मतों का कुल मूल्य को , संसद के निर्वाचित सदस्यों को कुल सदस्य संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता हे |
एक सांसद के मत का मूल्य = सभी राज्यों के विधायकों के मतों का कुल मूल्य
संसद के निर्वाचित सदस्यों की कुल सदस्य संख्या
राष्ट्रपति का चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत और गुप्त मतदान द्वारा होता है |
किसी उम्मीदवार को, राष्ट्रपति के चुनाव में निर्वाचित होने के लिए, मतों का यह निश्चित भाग प्राप्त करना आवश्यक है | मतों का यह निश्चित भाग, कुल वैध मतों की, निर्वाचित होने वाले कुल उम्मीदवारों (यहाँ केवल एक ही उम्मीदवार राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होता है ) की संख्या में एक जोड़कर प्राप्त सख्या द्वारा, भाग देने पर भागफल में एक जोड़कर प्राप्त होता है |
कुल वैध मत
निश्चित मतों का भाग = ------------------------------------------------- + 1
कुल निर्वाचित उम्मीदवार ( 1 ) + 1
निर्वाचक मंडल के प्रत्येक सदस्य को केवल एक मतपत्र दिया जाता है | मतदाता को मतदान करते समय उम्मीदवारों के नाम के आगे अपनी वरीयता 1, 2, 3, 4 अदि अंकित करनी होती है | इस प्रकार मतदाता उम्मीदवारों की उतनी वरीयता अदि दे सकता है, जितने उम्मीदवार होते हैं |
प्रथम चरण मे, प्रथम वरीयता के मतों की गणना होती हे | यदि उम्मीदवार निर्धारित मत प्राप्त कर लेता है तो वह निर्वाचित घोषित हो जाता है अन्यथा मतों के स्थानांतरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है | प्रथम वरीयता के न्यूनतम मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार के मतों को रद्द कर दिया जाता है तथा इसके द्वितीय वरीयता के मत अन्य उम्मीदवारों के प्रथम वरीयता के मतों में स्थानान्तरित कर दिए जाते हे , यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार निर्धारित मत प्राप्त नहीं कर लेता |
राष्ट्रपति चुनाव से सम्बंधित सभी विवादों की जांच व फैसले उच्चतम न्यायलय में होते है, तथा उसका फैसला अंतिम होता है |
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